Thursday, May 5, 2016

UP : चुनावी साल में बेदाग़ छवि के IAS को अगला मुख्य सचिव बनाने की मांग के लिए समाजसेवियों का धरना 21 मई को लखनऊ में





लखनऊ/05 मई 2016/ यूपी में अगले साल 2017 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में यह साल 2016 चुनावी साल होने के चलते यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है  सरकार की योजनाओं को लागू कराने में मुख्य सचिव की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होने की व्यवस्था के चलते ही यूपी की सरकार अपने मनपसंद आई..एस. को ही सूबे का मुख्य सचिव बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है ताकि वह आम जनता के लिए कम प्रभावी योजनाओं को भी अपने दिखावटी अंदाज में प्रस्तुत कर सुगमता से लागू करा सके  यही कारण रहा कि अखिलेश यादव ने स्वयं पत्र लिखकर वर्तमान मुख्य सचिव आलोक रंजन के सेवा-विस्तार की अनुशंषा की ताकि इस चुनावी वर्ष में सरकार रंजन के सहारे चुनावी वैतरिणी में अपना सफर जारी रख सके । अब सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर दागी आई..एस. अधिकारियों को ही सूबे का मुख्य सचिव बनाने का आरोप लग रहा है और इस बार अखिलेश पर यह आरोप सूबे के समाजसेवियों ने लगाया है  समाजसेवियों ने पूर्व मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और वर्तमान मुख्य सचिव आलोक रंजन को दागी बताते हुए अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोलकर किसी बेदाग़ छवि के IAS को ही यूपी को अगला मुख्य सचिव बनाने की मांग को एक धरने के माध्यम से जोरदार ढंग से उठाने की घोषणा की है


धरने की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि धरने का आयोजन आगामी 21 मई को लखनऊ के जी.पी.ओ. के पास स्थित महात्मा गांधी पार्क में लखनऊ की सामाजिक संस्था ‘येश्वर्याज सेवा संस्थान’ के तत्वावधान में किया जायेगा जिसमें प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों के समाजसेवी शिरकत करेंगे  उर्वशी ने बताया कि यूपी की सरकारें अपने निहितार्थ साधने के लिए ही दागदार छवि के आई.ए.एस. अधिकारियों को मुख्य सचिव जैसा महत्वपूर्ण पद सौंप रही हैं ताकि सरकार मदारी बन इन दागियों को बन्दर की तरह अपने इशारों पर नचा सकें उर्वशी के अनुसार दागी होने के नाते यह आई.ए.एस. भी जनहित को सर्वोपरि रखने का अपना कर्तव्य भूलकर सरकार के चाटुकार बन जाते हैं और आम जन के लिए जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देने के स्थान पर सरकार की दिखावटी योजनाओं की डुगडुगी पीट-पीट कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं बकौल उर्वशी यूपी की सरकार और यह दागी आई.ए.एस. परस्पर साधक-सिद्धक बन आम जनता की पीठ में छुरा घोंपकर एक दूसरे की अनियमितताओं को पोषित करते हैं जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार अपनी पैठ बनाता है


यूपी के पूर्ववर्ती मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को केंद्र की पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार के कोयला घोटाले का दागी और 30 जून 2016 तक सेवा विस्तार पाए आलोक रंजन को ई.ओ.यू.-1 दिल्ली के अपराध संख्या आर.सी.-2(ई)/2007,जिसमें दिनांक 09/09/2015 को अलोक रंजन के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति माँगी गयी है, का दागी बताते हुए उर्वशी ने अखिलेश यादव को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आड़े हाथों लेते हुए सबाल उठाया कि आखिर क्यों अखिलेश ने न केवल यूपी के दो दागी आई.ए.एस. अधिकारियों को लगातार यूपी का मुख्य सचिव बनाया बल्कि आलोक रंजन को तो तीन माह का सेवा विस्तार दिलाने में व्यक्तिगत रूचि भी ली ? उर्वशी के अनुसार अखिलेश के ऐसे कृत्यों से उनकी भ्रष्टाचार के मामले में मिस्टर क्लीन की छवि खुद-ब-खुद ही संदेह के दायरे में आ रही है


उर्वशी ने बताया कि इस चुनावी साल में आलोक रंजन का सेवा-विस्तार काल पूरा होने के बाद आगामी 1 जुलाई को किसी बेदाग़ छवि के IAS को ही सूबे के अगले मुख्य सचिव का कार्यभार ग्रहण कराने की मांग को सार्वजनिक रूप से उठाने के लिए वे 21 मई को लखनऊ के जी.पी.ओ. के पास स्थित महात्मा गांधी पार्क में यूपी के समाजसेवियों के साथ धरने पर बैठेंगी और धरने के बाद देश के प्रधानमंत्री और सूबे के राज्यपाल, मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी उर्वशी के अनुसार यदि उनके इस सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद भी किसी दागी आई.ए.एस. को सूबे का मुख्य सचिव बनाया जायेगा तो उनका संगठन उच्च न्यायालय में
पी.आई.एल. दायर कर सरकार के इस जन-विरोधी और भ्रष्टाचार को पोषित करने बाले कदम का विरोध करेगा






Wednesday, May 4, 2016

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा ’RTI भवन’ उद्घाटन का काले कपडे पहन काले झंडे दिखा विरोध करते हुए गिरफ्तारी देकर जेल जाने और जमानत नहीं कराने को तैयार लखनऊ की समाजसेविका उर्वशी शर्मा l



लखनऊ/04 मई 2016/ उत्तर प्रदेश की सरकार ने सरकारी खजाने से लगभग 25 करोड़ की भारी-भरकम रकम खर्च करके राज्य सूचना आयोग के लिए सभी अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस बिल्डिंग बना तो दी और इसे ‘RTI भवन’ का एक अच्छा सा नाम भी दे दिया पर लगता है कि उद्घाटन को लेकर इस  ‘RTI भवन’ की किस्मत कुछ ठीक नहीं है l  पहले इस ‘RTI भवन’ का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों बीते 11 अप्रैल को  होना था पर सूचना आयुक्तों की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध आरटीआई कार्यकर्ताओं  द्वारा उसी दिन ‘RTI भवन’ के मुख्य द्वार के सामने सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन करने के ऐलान के चलते अखिलेश ने कार्यक्रम से अपने हाथ पीछे खींच लिए और 11 अप्रैल से आयोग का विधिवत कार्य ‘RTI भवन’ का उद्घाटन हुए बिना ही आरम्भ हो गया था l अब भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा आगामी 8 जुलाई को RTI भवन का उद्घाटन करने की रजामंदी देने के साथ ही  आरटीआई कार्यकर्ताओं का एक नया ऐलान राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर के विभूतिखंड में उच्च न्यायालय के नए परिसर के पास बने इस ‘RTI भवन’ के उद्घाटन समारोह पर एक बार फिर ग्रहण लगा सकता है l



गौरतलब है कि सूबे की चर्चित आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग  में महिला यौन-उत्पीडन मामलों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार विशाखा समिति बनाने और आयोग की सभी कार्यवाहियों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग कराने,इन रिकॉर्डिंग्स को आईटी एक्ट में प्राविधानित समय तक संरक्षित रखकर किसी भी पक्ष द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराने के लिए अपने सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज सेवा संस्थान’ के माध्यम से एक मुहिम छेड़ रखी है l बीते 11 अप्रैल को उर्वशी के ही नेतृत्व में यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त समेत सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन किया गया था l







सामाजिक संगठन येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा ने अब इन मांगों को लेकर अपनी संस्था की ओर से ऐलान किया है कि वे आगामी 8 जुलाई को आरटीआई कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों को ‘आरटीआई भवन’ के मुख्यद्वार पर काले कपड़ों में  इकठ्ठा करेंगी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को काले झंडे दिखाकर  RTIRTI भवन के उद्घाटन का विरोध करेंगी l




उर्वशी ने बातचीत में बताया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति को एक पत्र भी भेजा है जिसमें उन्होंने हामिद अंसारी से अनुरोध किया है कि वे उद्घाटन से पूर्व आयोग में विशाखा समिति बनाने और आयोग की सभी कार्यवाहियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने संबंधी आरटीआई कार्यकर्ताओं की मांगों को पूरा कराये बिना ‘आरटीआई भवन का उद्घाटन करने न आयें अन्यथा आरटीआई कार्यकर्ताओं को काले कपडे पहन काले झंडे दिखाकर उनका विरोध प्रदर्शन करने को विवश होना पड़ेगा l उर्वशी ने बताया कि यदि उपराष्ट्रपति उनके संगठन की इन मांगों को आगामी उद्घाटन समारोह से पहले पूरा करा देते हैं तो सूबे के आरटीआई कार्यकर्ता उनके लखनऊ आगमन पर उनके जोरदार स्वागत के लिए तत्पर रहेंगे lबिना मांगे पूरी हुए ही हामिद अंसारी के द्वारा उद्घाटन समारोह में शिरकत करने के लिए आने पर इस मुद्दे पर उनको काले झंडे दिखाते हुए अपनी गिरफ्तारी देकर जेल जाने और उपरोक्त मांगें पूरी न होने तक अपनी जमानत भी नहीं कराने की बात भी उर्वशी ने अपने इस पत्र में लिखी है l




हामिद अंसारी से मार्मिक अपील करते हुए उर्वशी ने लिखा है कि देश के उपराष्ट्रपति होने के नाते यह उनका नैतिक और पदीय दायित्व है कि वे ऐसे किसी भी भवन का उद्घाटन करने के लिए तब तक न जाएँ जब तक वहां महिलाओं का और पारदर्शिता के सिपाहियों का उत्पीडन बंद होने के और अब तक हुए उत्पीडन के मामलों की जांच और कार्यवाही के मुकम्मल इंतजामात नहीं हो जाते है l








उर्वशी ने बताया कि उनको विश्वास है कि उपराष्ट्रपति द्वारा इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश जारी कर उनके संगठन की मांगे पूरी कराकर इसकी सूचना 08 जुलाई 2016 से पूर्व उन्हें दे दी जायेगी और उन्हें उपराष्ट्रपति का विरोध नहीं करना पड़ेगा किन्तु यदि आयोग में पारदर्शी कार्यप्रणाली स्थापित करने संबंधी उनके संगठन की ये मांगे पूरी नहीं होती है तो वे आरटीआई आवेदकों को उनका वेबजह होने बाला उत्पीडन रुकबाने के उनके हक़ की आबाज बुलंद करने के लिए उपराष्ट्रपति को काले झंडे दिखाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए देश भर के महिला और पुरुष आरटीआई कार्यकर्ताओं को  लामबंद कर रही हैं l




उर्वशी ने बताया कि उनके द्वारा किये गए पुतला दहन के दिन ही उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को RTIRTI भवन का उद्घाटन करने के लिए पत्र लिखा था जिस पर अंसारी ने  अपने पत्र संख्या VPIVPI-04/02/2016  दिनांक  27 अप्रैल 2016 द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग की नई बिल्डिंग ‘आरटीआई भवन’ का उद्घाटन आगामी 08 जुलाई 2016  को करने के लिए अपनी सहमति दे दी है जिसके सन्दर्भ से उन्होंने उपराष्ट्रपति को यह पत्र लिखकर उनको अवगत कराया है कि आरटीआई प्रयोगकर्ताओं द्वारा यूपी के लोक प्राधिकरणों के भ्रष्टाचार से सम्बंधित सूचना मांगने के मामलों के आयोग में आने पर उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त राज्य सरकार के एजेंटो के रूप में कार्य करते हैं और ऐसी सूचनाएं सार्वजनिक होने से रोकने के दुरुद्देश्य से आरटीआई प्रयोगकर्ताओं, जिनमें महिलायें भी शामिल हैं,के साथ अपने स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर दुर्व्यवहार तो करते ही हैं,साथ ही साथ उलटे इन्हीं पीड़ित  आरटीआई प्रयोगकर्ताओं को ‘सरकारी कार्य में बाधा डालने’ और ‘सूचना आयुक्तों से दुर्व्यवहार’ करने जैसे आरोप लगाकर पुलिस कार्यवाही करा देते हैं l उर्वशी ने लिखा है कि यूपी के सूचना आयुक्त आरटीआई एक्ट को जानते तो नहीं ही हैं और यदि कोई आरटीआई आवेदक एक्ट के प्राविधानों का जिक्र करते हुए सूचना दिलाने की मांग करता है तो सूचना आयुक्त उस पर ‘आरटीआई का धंधेबाज’ और ‘ब्लैकमेलर’ होने जैसे आरोप लगाकर आवेदक द्वारा सुनवाई के दौरान बहस करने के संवैधानिक अधिकार को स्वयं पर  ‘बेजा दबाब’ बनाने की संघ्या देते हैं और उसे बेइज्जत करके सुनवाई कक्ष से निकाल देते हैं l

   
उर्वशी ने हामिद अंसारी को यह भी बताया है कि यूपी की वर्तमान सपा सरकार की पूर्ववर्ती बसपा सरकार के समय उनके संगठन ने अन्य सामाजिक संगठनों के साथ एक लम्बी लड़ाई लड़कर यूपी के इंदिरा भवन लखनऊ स्थित परिसर में सूचना आयुक्तों की सुनवाइयों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग आरम्भ कराई थी परन्तु अपने भ्रष्ट हित साधने के लिए वर्तमान आयुक्तों द्वारा इन सीसीटीवी कैमरों को बंद करा दिया गया था और सीसीटीवी कैमरे बंद होते ही सूचना आयुक्तों ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत आरटीआई आवेदकों का उत्पीडन आरम्भ कर दिया और उनके संगठन को  यूपी के सूचना आयोग की कार्यवाहियों की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग पुनः उठाने को बाध्य होना पड़ा उर्वशी ने लिखा है कि उनको पूरी उम्मीद थी कि आम जनता के टैक्स के लगभग 25 करोड़ रुपये फूंककर बनाए गए नए ‘आरटीआई भवन’ में सूचना आयुक्तों की सुनवाइयों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग की मुकम्मल व्यवस्था होगी किन्तु दुर्भाग्य है कि इस ‘आरटीआई भवन’ में जनता पर नज़र रखने के लिए कैमरे हैं, आयुक्तों की सुख-सुविधा के सभी साधन हैं पर सुनवाइयों में सूचना आयुक्तों के कार्य व्यवहार और प्रपंच पर नज़र रखने के लिए एक भी कैमरा नहीं है l





उर्वशी ने लिखा है कि इससे व्यथित होकर ही सूबे के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने उनकी  अगुआई में ‘आरटीआई भवन’ में सुनवाई आरम्भ होने के दिन 11 अप्रैल 2016 को प्रातः 11:00 बजे इस भवन के मुख्य द्वार के सामने इकठ्ठा होकर मुख्य सूचना आयुक्त समेत सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर आयोग में विशाखा समिति बनाने और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांगें बुलंद कीं थीं पर अभी तक इस दिशा में कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है







उपराष्ट्रपति को संबोधित इस पत्र की प्रति देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सूबे के राज्यपाल राम नाईक,मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी, सूचना आयोग के सचिव,पुलिस महानिदेशक को भेजते हुए इसकी सूचना लखनऊ के जिला प्रशासन को भी डाक के माध्यम से और ई-मेल से भी भेजी गयी है l