Friday, May 20, 2016

UP : बेदाग़ छवि के IAS को ही अगला मुख्य सचिव बनाने की मांग के लिए कल लखनऊ में समाजसेवियों का होगा जमावड़ा




लखनऊ/20 मई 2016/ गिफ्ट में मिले 30 लाख के हार के खो जाने के चलते राज्यकर्मियों के मानवाधिकारों का हनन करने वाले यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन आजकल ख़बरों में छाए हुए हैं । कल राजधानी में बेदाग़ छवि के IAS को ही अगला मुख्य सचिव बनाने की मांग के लिए होने वाले एक धरने में रंजन एक बार फिर सूबे के समाजसेवियों के निशाने पर होंगे ।यूपी में अगले साल 2017 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं ऐसे में यह साल 2016 चुनावी साल होने के चलते यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है  सरकार की योजनाओं को लागू कराने में मुख्य सचिव की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होने की व्यवस्था के चलते ही यूपी की सरकार अपने मनपसंद आई..एस. को ही सूबे का मुख्य सचिव बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है ताकि वह आम जनता के लिए कम प्रभावी योजनाओं को भी अपने दिखावटी अंदाज में प्रस्तुत कर सुगमता से लागू करा सके  यही कारण रहा कि अखिलेश यादव ने स्वयं पत्र लिखकर वर्तमान मुख्य सचिव आलोक रंजन के सेवा-विस्तार की अनुशंषा की ताकि इस चुनावी वर्ष में सरकार रंजन के सहारे चुनावी वैतरिणी में अपना सफर जारी रख सके । अब सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर दागी आई..एस. अधिकारियों को ही सूबे का मुख्य सचिव बनाने का आरोप लग रहा है और इस बार अखिलेश पर यह आरोप सूबे के समाजसेवियों ने लगाया है  समाजसेवियों ने पूर्व मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और वर्तमान मुख्य सचिव आलोक रंजन को दागी बताते हुए अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोलकर किसी बेदाग़ छवि के IAS को ही यूपी को अगला मुख्य सचिव बनाने की मांग को एक धरने के माध्यम से जोरदार ढंग से उठाने की घोषणा की है


धरने की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि कल लखनऊ के जी.पी.ओ. के पास स्थित महात्मा गांधी पार्क में लखनऊ की सामाजिक संस्था ‘येश्वर्याज सेवा संस्थान’ के तत्वावधान में एक धरना देकर प्रदर्शन किया जाएगा जिसमें प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों के समाजसेवी शिरकत करेंगे  उर्वशी ने बताया कि यूपी की सरकारें अपने निहितार्थ साधने के लिए ही दागदार छवि के आई.ए.एस. अधिकारियों को मुख्य सचिव जैसा महत्वपूर्ण पद सौंप रही हैं ताकि सरकार मदारी बन इन दागियों को बन्दर की तरह अपने इशारों पर नचा सकें उर्वशी के अनुसार दागी होने के नाते यह आई.ए.एस. भी जनहित को सर्वोपरि रखने का अपना कर्तव्य भूलकर सरकार के चाटुकार बन जाते हैं और आम जन के लिए जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देने के स्थान पर सरकार की दिखावटी योजनाओं की डुगडुगी पीट-पीट कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं बकौल उर्वशी यूपी की सरकार और यह दागी आई.ए.एस. परस्पर साधक-सिद्धक बन आम जनता की पीठ में छुरा घोंपकर एक दूसरे की अनियमितताओं को पोषित करते हैं जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार अपनी पैठ बनाता है


यूपी के पूर्ववर्ती मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को केंद्र की पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार के कोयला घोटाले का दागी और 30 जून 2016 तक सेवा विस्तार पाए आलोक रंजन को ई.ओ.यू.-1 दिल्ली के अपराध संख्या आर.सी.-2(ई)/2007,जिसमें दिनांक 09/09/2015 को अलोक रंजन के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति माँगी गयी है, का दागी बताते हुए उर्वशी ने अखिलेश यादव को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आड़े हाथों लेते हुए सबाल उठाया कि आखिर क्यों अखिलेश ने न केवल यूपी के दो दागी आई.ए.एस. अधिकारियों को लगातार यूपी का मुख्य सचिव बनाया बल्कि आलोक रंजन को तो तीन माह का सेवा विस्तार दिलाने में व्यक्तिगत रूचि भी ली ? उर्वशी के अनुसार अखिलेश के ऐसे कृत्यों से उनकी भ्रष्टाचार के मामले में मिस्टर क्लीन की छवि खुद-ब-खुद ही संदेह के दायरे में आ रही है


उर्वशी ने बताया कि इस चुनावी साल में आलोक रंजन का सेवा-विस्तार काल पूरा होने के बाद आगामी 1 जुलाई को किसी बेदाग़ छवि के IAS को ही सूबे के अगले मुख्य सचिव का कार्यभार ग्रहण कराने की मांग को सार्वजनिक रूप से उठाने के लिए वे कल लखनऊ के जी.पी.ओ. के पास स्थित महात्मा गांधी पार्क में यूपी के समाजसेवियों के साथ धरने पर बैठेंगी और धरने के बाद देश के प्रधानमंत्री और सूबे के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपेंगी उर्वशी के अनुसार यदि उनके इस सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद भी किसी दागी आई.ए.एस. को सूबे का मुख्य सचिव बनाया जायेगा तो उनका संगठन उच्च न्यायालय में पी.आई.एल. दायर कर सरकार के इस जन-विरोधी और भ्रष्टाचार को पोषित करने बाले कदम का विरोध करेगा






यूपी : मुआवजों में भेदभाव की अखिलेश नीति : साधन-संपन्न रसूखदारों को बांटो - गरीब पीड़ितों को डांटो




राज्यपाल,डीएम लखनऊ के आश्वासन के बाद भी मृत आरटीआई कार्यकर्ता के परिवार को नहीं मिला मुआवजा : लखनऊ आकर आज से अनशन करेगा बहराइच का पीड़ित परिवार


 
लखनऊ/20-05-16 प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में पैठ रखने वाले बहराइच जिले के महसी ब्लॉक के हरदीगौरा गांव के  प्रधान त्रिलोकी नाथ को गुरु प्रसाद शुक्ला द्वारा आरटीआई का प्रयोग कर गांव में कराए गए विकास कार्यों से सम्बंधित भ्रष्टाचार उजागर कर प्रधान के खिलाफ कार्यवाही कराने को तत्पर होना इतना नागवार लगा कि उसने बीते 13 जून 2015 को अपने साथियों के साथ मिलकर गुरु प्रसाद शुक्ला की लाठी,डंडों,बांके और ईंटों से मार मार कर हत्या कर दी । मृत्यु से पूर्व गुरु प्रसाद ग्राम प्रधान की अनियमितताओं के खिलाफ तीन माह तक धरने पर भी बैठे थे जिसके बाद प्रधान की खामियों की जांच शुरू हो गई थी। गुरु प्रसाद ने त्रिलोकी नाथ से पहले के प्रधान के द्वारा किये घोटाले को भी उजागर करके उसके द्वारा गबन किये रुपये की रिकवरी कराई थी और अपने प्रयासों से उसको जेल भिजवाया था । गुरु प्रसाद के परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस भी हत्या की साजिश में शामिल थी।


हत्या से कुछ दिन पूर्व ही 18 अप्रैल 2015 को लखनऊ की सामाजिक संस्था येश्वर्याज सेवा संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय आरटीआई सेमिनार में गुरु प्रसाद को उनके सामाजिक योगदानों के लिए ही 'विष्णुदत्त मिश्रा मेमोरियल आरटीआई रत्न सम्मान 2015' से सम्मानित किया गया था।

भूमिहीन मजदूर गुरु प्रसाद की हत्या के बाद आर्थिक हालात खराब होने और गाँव के दबंगों से जान-माल की असुरक्षा के चलते पीड़ित परिवार ने ने बीते साल अगस्त माह में बहराइच के जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी मांगों के सम्बन्ध में अनशन किया था किन्तु जब बहराइच के जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद भी उनकी कोई भी मांग पूरी नहीं हुई तब निराश होकर वे 12 अक्टूबर 2015 से न्याय की आस लेकर लखनऊ में जी.पी.ओ. के पास महात्मा गांधी पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे आरटीआई कार्यकर्त्ता के इस धरने को येश्वर्याज सेवा संस्थान के साथ-साथ दर्जनों सामाजिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया था   

                 

बीते साल 26 अक्टूबर को लखनऊ के जिलाधिकारी द्वारा पीड़ित परिवार से वार्ता करके उनकी मांगे पूरी कराने का आश्वासं देने के बाद यह धरना स्थगित कर दिया गया था   बाद में येश्वर्याज सेवा संस्थान के आग्रह पर यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने भी पीड़ित परिवार से भेंट कर मांगे पूरी कराने का आश्वासं दिया था तथा किन्तु अब तक मांगे पूरी न होने के चलते व्यथित पीड़ित परिवार आज से लखनऊ के जी.पी.ओ. के पास महात्मा गांधी पार्क में अपने स्थगित धरने को फिर से शुरू करने को मजबूर हो गया है 
 
 
 
समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने सूबे की अखिलेश सरकार पर मुआवजों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में राज्यपाल और लखनऊ के जिलाधिकारी के आश्वासानों का भी कोई मूल्य न होना सिद्ध होने से स्पष्ट है कि अखिलेश प्रशासन मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में पूर्णतया संवेदनहीन है  उर्वशी ने अखिलेश द्वारा साधन-संपन्न रसूखदारों पर मुआवजा लुटाने और गरीब पीड़ितों को मुआवजा न देने वाला मतलबपरस्त संवेदनहीन मुख्यमंत्री बताते हुए अखिलेश सरकार की मुआवजा नीति को कटघरे में खड़ा किया है 
 
 
 
 
 
पीड़ित परिवार की 10 मांगें निम्नवत हैं   : 
 
1-          सामाजिक कार्यकर्ता स्व० गुरु प्रसाद भूमिहीन मजदूर और पीड़ित परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे l उनकी मृत्यु के बाद जान-माल के खतरे की बजह से पीड़ित  परिवारीजनों को गाँव में रातों में जागकर पहरा देना पड़ता है और इसीलिये ये  लोग दिन में कोई नियमित रोज़गार नहीं कर पा रहे है और इस कारण उनका परिवार धीरे-धीरे भुखमरी के कगार पर आ गया है अतः इन  परिवारीजनों को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए, किसी भी सरकारी योजना का 1  आवास दिया जाए और परिवार के 1 सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए l
2-     सभी परिवारीजनों और हत्याकांड के सभी गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जाए। 
3-     स्व० गुरुप्रसाद की हत्या की एफ. आई. आर.में इन परिवार वालों को पीटे जाने की धाराएं जोड़ी जाएँ l 
4-     स्व० गुरुप्रसाद की हत्या की एफ. आई. आर. के आरोपियों पर रासुका की धाराएं जोड़ी जाएँ l 
5-     स्व० गुरुप्रसाद के द्वरा उजागर की गयी वित्तीय अनियमित्ताओ और हत्या के प्रकरण की सीबीआई/सीबीसीआईडी जांच कराई जाए l
6-     स्व० गुरु प्रसाद द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में दायर सभी आरटीआई अपीलों की सूचनाओं को सूचना आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए l 
7-      स्व० गुरु प्रसाद द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में दायर सभी आरटीआई अपीलों पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के आयुक्तों द्वारा सूचना दिलाने में देरी के मामलों की जांच कराकर दोषी सूचना आयुक्तों को दण्डित किया जाए l 
8-     स्व० गुरु प्रसाद द्वारा की गयी शिकायतों का निपटारा  समयबद्ध रूप से किया जाए l 
9-     केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा स्व० गुरु प्रसाद द्वारा की गयी शिकायतों के निपटारे में देरी करने के मामलों की जांच कराकर दोषी अधिकारियों को दण्डित किया जाए l 
10-   बहराइच जिले के ब्लाक महसी में विगत 2 वर्षों में कराये गए विकास कार्यों की जांच कराई जाए l
 
 

Tuesday, May 17, 2016

येश्वर्याज सेवा संस्थान की साधारण सभा की बैठक आगामी 21 मई को लखनऊ में.






 



लखनऊ/17 मई 2016/ येश्वर्याज सेवा संस्थान लखनऊ स्थित एक सामाजिक संगठन है जो विगत 15 वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र  में कार्यरत है. येश्वर्याज की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि येश्वर्याज की साधारण सभा के बैठक आगामी 21 मई को लखनऊ के जी.पी.ओ. के पास स्थित महात्मा गांधी पार्क में सायं 4 बजे से 6 बजे तक समाजसेवी संजय शर्मा की अध्यक्षता में पूर्ण पारदर्शिता के साथ आम जनता के बीच होगी.



 



 



येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि इस संस्था का पंजीयन दिनांक 18/07/11 को किया गया था जो आगामी 17/07/16 तक वैध है उर्वशी ने बताया कि 21 मई की साधारण सभा में डिफाल्टर सदस्यों के निष्कासन, नए सदस्यों के पंजीयन , नयी कार्यकारिणी के गठन और संस्था के पंजीयन के नवीनीकरण सहित संस्था के द्वारा भविष्य में किये जाने बाले सामाजिक कार्यों पर विचार विमर्श कर निर्णय लिए जायेंगे. संस्था की साधारण सभा की बैठक की कार्यवाही देखने के लिए आम जनता को सार्वजनिक निमंत्रण देने की बात भी उर्वशी ने कही है.



 



 



बकौल उर्वशी, अपने एनजीओ की इस खुली  बैठक के जरिये वे दुनिया को बताना चाहती हैं कि पारदर्शिता के मुद्दे पर उनकी संस्था जैसी अपेक्षा सरकार से करती है वैसा ही व्यवहार वह स्वयं भी करती है.



 



 

Saturday, May 14, 2016

उत्तर प्रदेश में कार्यरत शातिर आई०ए० एस० सुनील कुमार (समाज कल्याण विभाग का प्रमुख सचिव), शातिर आई०ए० एस० सदाकांत (आवास एवं शहरी नियोजन विभाग का प्रमुख सचिव) आदि द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त होकर फर्जीबाड़ा करके द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पद पर अवैध नियुक्ति करने के मामले की जांच कराकर दोषियों को दण्डित कराने के सम्बन्ध में


  
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urvashi sharma

<rtimahilamanchup@gmail.com>
Tue, May 10, 2016 at 9:23 PM
To: hgovup <hgovup@up.nic.in>, hgovup <hgovup@nic.in>, hgovup <hgovup@gov.in>

महोदय,
येश्वर्याज सेवा संस्थान लखनऊ स्थित एक सामाजिक संगठन है जो विगत 15
वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता
संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र  में कार्यरत है l

आपको अवगत कराना है कि सुनील कुमार और सदाकांत उपरोक्त ने अन्य सचिवालय
कर्मियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार में लिप्त होकर एक कूटरचित दस्तावेज
तैयार किया और इसे उत्तर प्रदेश समाज कल्याण अनुभाग-1 के कार्यालय ज्ञाप
संख्या 3783/26-1-2014-119 (70)/02  लखनऊ दिनांक 04 दिसम्बर 2014 के रूप
में जारी किया lयह कूटरचित दस्तावेज उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ की याचिका
संख्या 110/एसबी/2004 के आदेश दिनांक 24-02-06 , सर्वोच्च न्यायालय की
याचिका संख्या SLP(C ) No. 7096/2008 के आदेश दिनांक 01-02-2008, उच्च
न्यायालय लखनऊ खंडपीठ की याचिका संख्या 1735/एसबी/2010 के आदेश दिनांक
24-11-,विभाग की सेवा नियमावली और विनियमितीकरण नियमावली के उपबन्धों को
खूंटी पर टांगकर द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पद पर पद की अर्हता धारित न
करने वाले व्यक्ति का अवैध विनियमितीकरण करके इन भ्रष्ट विपक्षीगणों ने
अपने व्यक्तिगत निहितार्थ साधने को राज्य सरकार को आर्थिक क्षति भी कारित
की  l इन भ्रष्ट अधिकारियों ने इस जघन्य अपराध को कारित करने में उच्च
न्यायालय लखनऊ खंडपीठ की याचिका संख्या 400/एसबी/2013 के आदेश दिनांक
02-04-13 के अनुपालन में उत्तर प्रदेश समाज कल्याण अनुभाग-1 द्वारा जारी
कार्यालय ज्ञाप संख्या 1280/26-1-2013-119(72)/2006 लखनऊ दिनांक 02 जुलाई
2013 के तथ्यों को भी छुपाया गया l

मेरे द्वारा लोकायुक्त उत्तर प्रदेश से शिकायत करने के बाद इन भ्रष्टों
में से एक सुनील कुमार ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है जिसका प्रमाण
उत्तर प्रदेश समाज कल्याण अनुभाग – 1 का कार्यालय ज्ञाप संख्या
3219/26-1-2015-स0क0-1 लखनऊ दिनांक 24 अक्टूबर 2015 है l दूसरा शातिर
महाभ्रष्ट सदाकांत 200 करोड़ की रिश्वत लेने के चलते ACB, Dehradun के
अपराध संख्या RC-11(A)/2010 का अभियुक्त है और इसके खिलाफ 09/11/12 को
अभियोजन की स्वीकृति माँगी गयी है जो अभी प्रक्रियाधीन है l

अतः आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण की जांच कराकर उत्तर प्रदेश के इन दो
महाभ्रष्ट आई०ए० एस० सुनील कुमार और सदाकांत के साथ साथ  उत्तर प्रदेश
सचिवालय के अन्य कार्मिकों को उनके इस सिद्ध अपराध के लिए दण्डित कराकर
इन सबके खिलाफ विधिक कार्यवाही भी कराएं और इसकी सूचना हमारी संस्था को
भी दें l

अत्यधिक अपेक्षाओं सहित सादर प्रेषित l
  भवदीया

( उर्वशी शर्मा )
   सचिव


--
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
Patron  - Campaign to Protect RTI ( CPRI )
Vice Chairman - Save Cultural Values Foundation
102,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513

Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption   9455553838


http://upcpri.blogspot.in/

यूपी : मुख्य सूचना आयुक्त को मानहानि का नोटिस भेजेगा एनजीओ






लखनऊ/14 मई 2016... यूपी का एक एनजीओ सूबे के मुख्य सूचना आयुक्त और पूर्व मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को मानहानि का नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है l दरअसल इस एनजीओ ने यूपी के सबसे खराब सूचना आयुक्त का पता लगाने और यूपी में आरटीआई के मार्ग की सबसे बड़ी वाधा का पता लगाने के लिए बीते 23 अप्रैल को राजधानी में एक सर्वे कराया था l एनजीओ ने बीते 30 अप्रैल को लखनऊ में एक प्रेस वार्ता करके सर्वे के परिणाम जारी किये थे l एनजीओ के पदाधिकारियों ने मुख्य सूचना आयुक्त से बीते 5 मई को भेंट करके  सर्वे के परिणामों को उनको सौंपते हुए इन पर कार्यवाही करने की माँग भी की थी l इसके बाद मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने बीते 9 मई को मीडिया के माध्यम से इस एनजीओ की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए संस्था के द्वारा कराये गए सर्वे के परिणामों पर कोई भी कार्यवाही नहीं करने का वक्तव्य दिया था l  उस्मानी के इस वक्तव्य को संस्था के लिए मानहानिकारक बताकर एनजीओ अब उस्मानी को मानहानि का नोटिस देने की तैयारी कर रहा है l एनजीओ ने उस्मानी पर लोकसेवक के दायित्वों का सम्यक निर्वहन न करने का भी आरोप लगाया है l


दरअसल यूपी के सबसे खराब सूचना आयुक्त का पता लगाने और यूपी में आरटीआई के मार्ग की सबसे बड़ी वाधा का पता लगाने के लिए सामाजिक संस्था येश्वर्याज सेवा संस्थानकी ओर से एक सर्वे कराया गया था। सर्वे में  उत्तराखंड के हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के
आगरा,बहराइच,बरेली,बस्ती, देवरिया,इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गोंडा,
जालौन, कानपुर, लखनऊ,मऊ,रायबरेली,सीतापुर,श्रावस्ती,सुल्तानपुर और उन्नाव
जिले के लोगों ने भाग लेकर यूपी के सबसे खराब सूचना आयुक्त का और यूपी
में आरटीआई एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा
का चुनाव करने के येश्वर्याज के इस अनूठे सर्वे में अपनी राय व्यक्त की थी l  सर्वे में व्यक्त
कुल मतों में से 17% मत पाकर अरविन्द सिंह बिष्ट पहली पायदान पर रहे.
13.8%
मत पाकर मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी दूसरी पायदान पर, 11.6%
मत पाकर गजेन्द्र यादव तीसरी पायदान पर,9.4% मत पाकर हाफिज उस्मान चौथी
पायदान पर, 9.1% मत पाकर स्वदेश कुमार पांचवीं पायदान पर,8.4% मत पाकर
पारस नाथ गुप्ता छठी पायदान पर,8.1% मत पाकर खदीजतुल कुबरा सातवीं पायदान
पर, 7.9% मत पाकर राजकेश्वर सिंह आठवीं पायदान पर और बराबर-बराबर 7.2% मत
पाकर दो सूचना आयुक्त सैयद हैदर अब्बास रिज़वी और विजय शंकर शर्मा आख़िरी
पायदान पर रहे थे l
आरटीआई एक्ट के क्रियान्वयन की सबसे बड़ी बाधा का पता लगाने के लिए किये
सर्वे में लोगों ने  कुल पड़े मतों में से 28% मत देकर जन सूचना
अधिकारियों द्वारा आरटीआई आवेदनों के निस्तारण में की जा रही हीलाहवाली
को आरटीआई एक्ट के क्रियान्वयन की सबसे बड़ी बाधा बताया. सर्वे के अनुसार
25.4%
मत पाकर सूचना आयोग की खराब कार्यप्रणाली आरटीआई एक्ट के
क्रियान्वयन की दूसरी बड़ी बाधा के रूप में सामने आयी. 24.3% मत पाकर
आरटीआई रूल्स 2015 तीसरी और 22.2% मत पाकर प्रथम अपीलीय अधिकारियों का
गैर-जिम्मेदाराना रवैया आरटीआई एक्ट के क्रियान्वयन की चौथी बाधा के रूप
में सामने आया था l


 संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि उस्मानी द्वारा मीडिया को दिए एक इंटरव्यू से उनके संज्ञान में आया है कि मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी का कहना है “सर्वे कराने वाली संस्था कोई सर्टिफाइड सर्वेयर संस्था नहीं है। इसकी कोई क्रेडिबिलिटी नहीं है। इसके नतीजों पर हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।” उर्वशी ने बताया कि उस्मानी का कहना है, ‘इस तरह कोई भी आदमी आए और कहे कि हमने सर्वे कराया है। फिर कहे कि इस पर कार्रवाई करें। इसका कोई औचित्य नहीं है। उर्वशी ने बताया कि उनको पता चला है कि यह पूछे जाने पर यदि इस सर्वे के नतीजों पर आयोग अपना कोई पक्ष नहीं रखता है तो यह माना जाएगा कि सर्वे के नतीजे सही हैं। इस पर जावेद उस्मानी ने कहा कि पक्ष तब रखा जाता है, जब इसकी कोई विश्वसनीयता हो।


उर्वशी ने बताया कि उनको पता चला है कि यह पूछे जाने पर कि फिर यदि सर्वे सही नहीं है तो क्या आयोग संस्था पर कोई कार्रवाई करेगा ? मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि क्या उन्होंने कोई अवैध काम किया है ? कोई जुर्म किया है? हम उन्हें इग्नोर करेंगे।


उर्वशी ने उस्मानी के इन वक्तव्यों को संस्था के लिए मानहानिकारक बताकर उस्मानी को अधिवक्ता के मार्फत मानहानि का नोटिस देने की बात कही है l उर्वशी ने उस्मानी पर लोकसेवक के दायित्वों का सम्यक निर्वहन न करने का भी आरोप लगाया है l उर्वशी का कहना है कि उन्होंने उस्मानी को बाकायदा सूचित करके आयोग के एक प्रतिनिधि को सर्वे में भेजकर सर्वे का पर्यवेक्षण करने का न्योता भी दिया था और इसीलिये उस्मानी को अब इस सर्वे पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है l  



उर्वशी के मुताबिक उनका एनजीओ राज्य सरकार से पंजीकृत संस्था है और लोकसेवक होते हुए भी उस्मानी ने उनकी संस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाकर संस्था की मानहानि करने के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा स्थापित व्यवस्था का भी अवमान किया है lउर्वशी के अनुसार विधि द्वारा स्थापित उनके सामाजिक संगठन को उस्मानी जब तक भंग नहीं करा देते तब तक वह इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकते l


बकौल उर्वशी उनके सर्वे का परिणाम जनता का आदेश है और इसको न मानने की सार्वजनिक घोषणा करके उस्मानी ने एक लोकसेवक के दायित्वों का सम्यक निर्वहन न करने का अपराध भी किया है जिसके लिए उनके खिलाफ अलग से कानूनी कार्यवाही कराई जायेगी l


उर्वशी ने उस्मानी द्वारा एशिया का नोबेल माने जाने वाले मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी डा० संदीप पाण्डेय द्वारा येश्वर्याज के सर्वे में व्यक्त राय को भी हलके में लेने की बात को उस्मानी का ब्यूरोक्रेटिक माइंडसेट के साथ दर्शाया गया मानसिक दिवालियापन करार दिया है l


उर्वशी ने उस्मानी पर मुख्य सूचना आयुक्त के दायित्वों का निर्वहन न करने और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर बनने के लिए जोड़-तोड़ करने का आरोप भी लगाया है l